Sunday, 31 October 2021

दिपावली के कुछ सरल उपाय

 दीपावली पर क्या करें क्या ना करें


मित्रों जैसा आप जानते हैं कि धनतेरस ,रुप चुतर्दशी और दिपावली पर कई साधानाएं और तांत्रिक टोटको द्वारा भी पुजा विधान किया जाता है कई साधक भक्त अपनी या गुरूओ के वचनों अनुसार पुजा और साधना कर्म करते हैं तो सरलीकरण विधी से आम ग्रहस्थ और साधारण इंसान भी सौम्य साधनाएं और टोटके कर सकते हैं मित्रों धनतेरस से भाई दूज तक करीब 5 दिनों तक चलने वाला दिवाली का त्यौहार कार्तिक माह की अमावस्या को आाता है अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार यह त्योहार 4 नबंबर 2021 गुरुवार को मनाया जाएगा और इसके एक दिन पहले धनतेरस और एक दिन बाद भाईदूज का त्योहार रहेगा ,

मित्रों रात को 12 बजे दीपावली पूजन के बाद चूने या गेरू में रुई भिगोकर चक्की, चूल्हा, सिल तथा छाज (सूप) पर तिलक करें.

पूजा जप तप के दौरान दीपको से काजलो जरूर ले और दीपकों का काजल स्त्री और पुरुष अपनी आंखों पर जरूर लगाएं अपने घरो के मुख्य दरवाजो पर बाहर ॐ या स्वास्तिक जरूर बनाएं,

दीपावली के दूसरे दिन सुबह 4 बजे उठकर पुराने छाज में कूड़ा रखकर उसे दूर फेंकने के लिए ले जाते समय ‘लक्ष्मी-लक्ष्मी आओ, दरिद्र-दरिद्र जाओ’ कहने की मान्यता है. इससे घर की दरिद्रता दूर होती है ,दिवाली में पूजा के लिए सबसे पहले पूजा का संकल्प लें,

दिवाली के दिन भगवान कुबेर, भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, माता सरस्वती की पूजा मुख्य रूप से करें

एक लकड़ी की चौकी लेकर उसमे लाल कपड़ा बिछाएं

फिर 1 मुट्ठी अनाज चौकी पर रखें और उसके ऊपर जल से भरा एक कलश रखें,

कलश में एक सुपारी, एक चांदी का सिक्का और एक फूल डालें।

आम के पत्ते कलश पर डाल कर उसके ऊपर लाल कपड़े में लपेट कर एक जटा नारियल स्थापित कर दें और उनकी प्रतिमा के समक्ष 7,11 या 21 दीपक जलाएं,

ॐ श्री श्री नमः का 11 बार या एक माला जाप करें,

श्री यंत्र की पूजा करें और इसे उत्तर पूर्व दिशा में रखें इस दिन देवी सूक्त का पाठ अवश्य करें पूजा के अंत में गणेश जी की और मां लक्ष्मी (मां लक्ष्मी को इन चीज़ों का लगाएं भोग) की आरती करें दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी को सिंघाड़ा और अनार का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

कुछ लोग पूजा के दौरान सीताफल को रखना भी शुभ मानते है इस दिन आप पूजा में गन्ना भी रख सकते हैं। भोग के रूप में देवी लक्ष्मी को हलवा और खीर और गणेश जी को लड्डुओं का भोग लगाया जाता है, मित्रों कुछ बातों का विशेष ख्याल रखें जैसे, चटका या टूटा हुआ कांच घर में रखना अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि कांच की टूटी हुई चीजों से घर में निगेटिव एनर्जी आती है ऐसे में अगर आपके घर में भी कहीं खिड़की, बल्ब या फेस मिरर का कांच टूटा हुआ या चटका भी हो तो उसे इस बार दिपावाली की सफाई में बदलवा दें,दीवार पर टांगने वाली घड़ी हो या कलाई में पहनने वाली, इसका बंद होना अशुभ माना जाता है। घड़ी को सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है कहा जाता है कि घड़ी के बंद होने से किस्मत भी बंद हो जाती है। अगर आपके घर में भी बंद घड़ी पड़ी हुई है तो उसे दिवाली से पहले बाहर फेंक दें, घर में कभी भी देवी देवताओं की टूटी मूर्ति नहीं रखनी चाहिए,माना जाता है कि ऐसी मूर्तियां घर में दुर्भाग्य लाती हैं ऐसे में अगर आपके घर में भी टूटी या पूरानी मूर्तियां हैं तो इस दिवाली सफाई करने के साथ ही भगवान की नई मूर्ति घर के मंदिर में स्थापित करें और पुरानी मूर्ति को कहीं विसर्जित कर दें, अगर आपने घर में फटे-पुराने जूते चप्पल को अभी तक रखा है तो दिवाली की सफाई करते समय उन्हें बाहर निकाल दें कहा जाता है कि फटे जूते और चप्पल घर में नकारात्मकता और दुर्भाग्य लाते हैं, ऐसा माना जाता है कि रसोई में कभी भी टूटे हुए बर्तन नहीं रखने चाहिए और न ही किसी को टूटे बर्तन में खाना परोसना चाहिए टूटे बर्तनों को घर में रखना अशुभ माना जाता है ऐसे बर्तनों में खाना खाने से घर में दरिद्रता बढ़ती है। तो इस दिवाली सफाई के दौरान अपने घर से टूटे या चटके हुए बर्तनों को बाहर निकाल दें नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी, इस दिन मां लक्ष्मी जी और बाबा गणेश जी की पुजा विधी के बाद आप निशाकाल को अपने आराध्य देव या देवी का जाप हवन कर सकते हैं और अपने जपे हुये मंत्रो और गुरू मंत्र का पुनश्चरण कर सकते हैं हवन जप के साथ अपनी गुरू क्रिया को भी दुहरा सकते हैं ,, अपने आस पास कोई दिव्य स्थान हो तो वहां भी इन पांच दिनों तक रोज दीपक जलाये इनके अलावा पीपल , आंवला,समी, वटवृक्ष, के जड़ों में दीपक जलाये और अपने परिवार के लिए खुशहाली की कामना करे ध्यान रहे यह सभी क्रियाएं निशाकाल में हो 🌹🙏🏻

जय मां जय हो बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश 🌹🙏🏻

दिपावली पूजन मुहूर्त और दुर्लभ संयोग

 मित्रों दिपावली सनातन धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार है आईये जानते हैं इसकी पुजा विधी और मुर्हुत और पुजा कैसे करें और क्या समाग्री चाहिए,,


मित्रों कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को दीपों का पर्व दिपावाली मनाया जाता है. मित्रों इस वर्ष गुरुवार 4 नवंबर 2021 को ये त्योहार मनाया जाएगा. दिपावाली पर मां लक्ष्मी और गणेश जी का पूजन करने का विधान है. इस साल एक ही राशि में चार ग्रहों के होने से दिपावाली पर दुर्लभ संयोग भी बन रहा है. आईये मित्रों वो क्या दुर्लभ सयोग है कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 4 नंवबर 2021 दिन गुरुवार को दिवाली मनाई जाएगी है. इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है. इस साल दिवाली पर दुर्लभ संयोग बन रहा है.  सनातनी पंचांग और ज्योतिषाचार्या के अुनसार चार ग्रह एक ही राशि में हैं, यानि एक ही राशि में इन चारों ग्रहों की युति है. इस वजह से ये दिपावाली लोगों के लिए अत्यंत शुभ रहेगी. देवु मां लक्ष्मी और बाबा गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त होगा और जातकों को लाभ ही लाभ होगा.तुला राशि के स्वामी शुक्र हैं. लक्ष्मी जी की पूजा से शुक्र ग्रह की शुभता में वृद्धि होती है. ज्योतिषचार्यो के और हिन्दू शास्त्रों के अनुसार शुक्र को लग्जरी लाइफ, सुख-सुविधाओं आदि का कारक माना गया है. वहीं सूर्य को ग्रहों का राजा, मंगल को ग्रहों का सेनापति और बुध को ग्रहों का राजकुमार कहा गया है. इसके साथ ही चंद्रमा को मन का कारक माना गया है. वहीं सूर्य पिता तो चंद्रमा को माता कारक माना गया है , दिवाली का पर्व आने वाला है, इस पर्व में अब कुछ ही तीन चार दिन ही शेष है और हम पोस्ट लेट करने के लिए क्षमा चाहते हैं, दिपावाली की तैयारियां सभी घरों में आरंभ हो चुकी है. दिपावाली का पर्व कार्तिक मास का प्रमुख पर्व है. दिपावाली पर लक्ष्मी जी की विशेष पूजा की जाती है. दिपावाली पर लक्ष्मी पूजन को महत्वपूर्ण माना गया है. ये पर्व लक्ष्मी जी को समर्पित है. इस दिन शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक लक्ष्मी जी की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है. इस वर्ष दिपावाली के दिन लक्ष्मी पूजन का शुभ योग में किया जाएगा. दिवाली पूजन का महत्व दिवाली पर लक्ष्मी पूजन जीवन में आने वाली आर्थिक परेशानियों को दूर करना वाला माना गया है. शास्त्रों में लक्ष्मी जी को वैभव की देवी माना गया है. लक्ष्मी जी की कृपा से जीवन में संपन्नता आती है. कष्टों से मुक्ति मिलती है. मान्यता है कि दिवाली की रात शुभ मुहूर्त में पूजा करने से लक्ष्मी जी की विशेष कृपा प्राप्तत होती है. यही कारण है दिपावाली की पूजा का लोगों को इंतजार रहता है. 

पंचांग के अनुसार दिवाली का पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. 

सनातनी हिंदू कैंलेडर के अनुसार इस वर्ष कार्तिक अमावस्या 4 नवंबर 2021 को है. इस दिन चंद्रमा का गोचर तुला राशि में होगा.

दिपावाली 2021, शुभ मुहूर्त (Dipawali 2021)

दिपावाली पर्व: 4 नवंबर, 2021, गुरुवार

अमावस्या तिथि का प्रारम्भ: 4 नवंबर 2021 को प्रात: 06:03 बजे से.

अमावस्या तिथि का समापन: 5 नवंबर 2021 को प्रात: 02:44 बजे तक.

मां लक्ष्मी पूजन मुहूर्त (maa Lakshmi Puja 2021 Date)

4 नवंबर 2021, गुरुवार, शाम 06 बजकर 09 मिनट से रात्रि 08 बजकर 20 मिनट

अवधि: 1 घंटे 55 मिनट

प्रदोष काल: 17:34:09 से 20:10:27 तक

वृषभ काल: 18:10:29 से 20:06:20 तक

भारतीय या जगह स्थान काल दिशा के अनुसार कुछ समय आगे पीछे हो सकता है,

दीपावली 2021 शुभ मुहूर्त

दीपावली 04 नवंबर 2021, दिन गुरूवार को है।

लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त

शाम 06:10 बजे से रात्रि 08:06 बजे तक

पूजा की अवधि

01 घंटा 54 मिनट

प्रदोष काल मुहूर्त

शाम 05:34 बजे से रात्रि 08:10 बजे तक

अमावस्या तिथि प्रारंभ

04 नवबंर 2021, सुबह 06:03 बजे से

अमावस्या तिथि समाप्त

05 नवबंर 2021, 02:44 बजे

दिपावली पुजा की समाग्री और सरलीकरण पुजा विधान, समाग्री और पुजा विधान सही से पढ़कर समाग्री की व्यवस्था कर सकते हैं 

एक लकड़ी की चौकी.

चौकी को ढकने के लिए लाल या पीला कपड़ा.

देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां/चित्र.

कुमकुम

चंदन

हल्दी

रोली

अक्षत

पान और सुपारी

साबुत नारियल अपनी भूसी के साथ

अगरबत्ती

दीपक के लिए घी

पीतल का दीपक या मिट्टी का दीपक

कपास की बत्ती

पंचामृत

गंगाजल

पुष्प

फल

कलश

जल

आम के पत्ते

कपूर

कलाव

साबुत गेहूं के दाने

दूर्वा घास

जनेऊ

धूप

एक छोटी झाड़ू

दक्षिणा (नोट और सिक्के)

आरती थाली

मित्रों दिपावाली की सफाई बहुत जरूरी है. अपने घर के हर कोने को साफ करने के बाद गंगाजल गोमुत्र जरूर छिड़कें हो सके तो इनके साथ बाबा हनुमान जी का चरणामृत भी मिला सकते हैं या किसी तीर्थ स्थान का या किसी सिद्ध पीठ का चरणामृत भी मिला सकते हैं नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी,

लकड़ी की चौकी पर लाल सूती कपड़ा बिछाएं. बीच में मुट्ठी भर अनाज रखें,

कलश (चांदी/कांस्य का बर्तन) को अनाज के बीच में रखें.

कलश में 75% पानी भरकर एक सुपारी (सुपारी), गेंदे का फूल, एक सिक्का और कुछ चावल के दाने डाल दें.

कलश पर 5 आम के पत्ते गोलाकार आकार में रखें.

केंद्र में देवी लक्ष्मी की मूर्ति और कलश के दाहिनी ओर (दक्षिण-पश्चिम दिशा) में भगवान गणेश की मूर्ति रखें.

एक छोटी थाली लें और चावल के दानों का एक छोटा सा पहाड़ बनाएं,

हल्दी से कमल का फूल बनाएं, कुछ सिक्के डालें और मूर्ति के सामने रखें.

अब अपने व्यापार/लेखा पुस्तक और अन्य धन/व्यवसाय से संबंधित वस्तुओं को मूर्ति के सामने रखें साधक या भक्त अपने माला कवच कडे भी रख सकते हैं ,

अब देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश को तिलक करें और दीपक जलाएं. कलश पर भी तिलक लगाएं.

अब भगवान गणेश और लक्ष्मी को फूल चढ़ाएं. पूजा के लिए अपनी हथेली में कुछ फूल रखें.

अपनी आंखें बंद करें और दिवाली पूजा मंत्र का पाठ करें.

हथेली में रखे फूल को भगवान गणेश और लक्ष्मी जी को चढ़ा दें.

लक्ष्मीजी की मूर्ति लें और उसे पानी से स्नान कराएं और उसके बाद पंचामृत से स्नान कराएं.

इसे फिर से पानी से स्नान कराएं, एक साफ कपड़े से पोछें और वापस रख दें.

मूर्ति पर हल्दी, कुमकुम और चावल डालें. माला को देवी के गले में लगाएं. अगरबत्ती जलाएं.

नारियल, सुपारी, पान का पत्ता माता को अर्पित करें.

देवी की मूर्ति के सामने कुछ फूल और सिक्के रखें.

थाली में दीया लें, पूजा की घंटी बजाएं और लक्ष्मी जी की आरती करें.

#विशेष,,

दिपावाली पर ध्यान रखें ये खास बातें

लक्ष्मी पूजन की सामग्री में गन्ना, कमल गट्टा, खड़ी हल्दी, बिल्वपत्र, पंचामृत, गंगाजल, ऊन का आसन, रत्न आभूषण, गाय का गोबर, सिंदूर, भोजपत्र का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए.

मां लक्ष्मी को पुष्प में कमल व गुलाब प्रिय हैं. फल में श्रीफल, सीताफल, बेर, अनार व सिंघाड़े प्रिय हैं. इनका भोग जरूर लगाएं सुगंध में केवड़ा गुलाब, चंदन के इत्र का इस्तेमाल महालक्ष्मी पूजन में जरूर करें. अनाज में चावल और मिठाई में घर में शुद्ध घी से बनी केसर की मिठाई या हलवा नैवेद्य में जरूर रखें. व्यावसायिक प्रतिष्ठान और गद्दी की भी विधि पूर्वक पूजा करें. लक्ष्मी पूजन रात के 12 बजे करने का विशेष महत्व होता है. धन की देवी लक्ष्मी जी को प्रसन्न करना है तो दीयों के प्रकाश के लिए गाय का घी, मूंगफली या तिल के तेल का इस्तेमाल करें. देरे के लिए क्षमा मित्रों नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर,,

जय मां जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश 🌹🙏🏻

धनतेरस का पुजा विधान कैसे करें

 जय मां बाबा की मित्रों इस बार कुछ लेट पोस्ट कर रहे हैं सनातन धर्म में दिपावली का बहुत बड़ा महत्व होता है पर इस से दो दिन में पहले धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में धनतेरस और दीपावली दोनों ही आती है इस बार धनतेरस मंगलवार 2 नवंबर 2021 को मनाया जाएगा,


मित्रों सनातन धर्म की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब प्रभु धन्वंतरि प्रकट हुए थे तब उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करना बेहद शुभ माना  जाता है इस तिथि को धन्वंतरि जयंती या धन त्रयोदशी के नाम से भी जानते हैं इस दिन बर्तन (पीतल चांदी सोना और ताम्बे के)और गहने आदि की खरीदारी करना बेहद शुभ होता है मित्रों इस दिन भी क्यों होती है महालक्ष्मी की पूजा- कहते हैं कि धनतेरस के दिन प्रभु धन्वंतरि जी और मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं रहती है इस दिन प्रभु कुबेर जी की पूजा की भी विधान है और इसी दिन से आप छतीस यक्षिणीयों में से किसी भी यक्षिणी की साधना शुरू कर सकते हैं क्योंकि प्रभु कुबेर जी को यक्षराज भी कहां जाता है यानि अधिपति देवता,

मित्रों आईये जानते हैं धनतेरस 2021 शुभ मुहूर्त- और पुजा विधान

धनतेरस तिथि 2021- 2 नवंबर, मंगलवार

धन त्रयोदशी पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 5 बजकर 25 मिनट से शाम 6 बजे तक।

प्रदोष काल- शाम 05:39 से  20:14 बजे तक।

वृषभ काल- शाम 06:51 से 20:47 तक।

धनतेरस पूजा विधि-

1. सबसे पहले चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं

2. अब गंगाजल छिड़कर भगवान धन्वंतरि, माता महालक्ष्मी और भगवान कुबेर की प्रतिमा या फोटो स्थापित करें

3. भगवान के सामने देसी घी का दीपक, धूप और अगरबत्ती जलाएं

4. अब देवी-देवताओं को लाल फूल अर्पित करें

5. अब आपने इस दिन जिस भी धातु या फिर बर्तन अथवा ज्वेलरी की खरीदारी की है, उसे चौकी पर रखें

6. लक्ष्मी स्तोत्र, लक्ष्मी चालीसा, लक्ष्मी यंत्र, कुबेर यंत्र और कुबेर स्तोत्र का पाठ करें

7. धनतेरस की पूजा के दौरान लक्ष्मी माता के मंत्रों का जाप करें और मिठाई का भोग भी लगाएं

धनतेरस की शाम के समय उत्तर दिशा में कुबेर, धन्वंतरि भगवान और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. पूजा के समय घी का दीपक जलाएं. कुबेर को सफेद मिठाई और भगवान धन्वंतरि को पीली मिठाई चढ़ाएं. पूजा करते समय “ॐ ह्रीं कुबेराय नमः” मंत्र का जाप करें. फिर धन्वंतरि स्तोत्र का पाठ करें. इसके बाद भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करें. और मिट्टी का दीपक जलाएं. माता लक्ष्मी और भगवान गणेश को भोग लगाएं और फूल चढ़ाएं,

जय मां जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश 🌹🙏🏻

धनतेरस पर क्या करें क्या ना करें,

 मित्रों धनतेरस पर क्या करें क्या ना करें उपाय और टोटके,

मित्रों इस धनतेरस के दिन त्रिपुष्कर योग ब


न रहा है ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि इस योग में जो भी कार्य करते हैं, उसका तिगुना फल प्राप्त होता है इसलिए इस दिन कोई भी बुरा कार्य करने से बचना चाहिए वहीं इस दिन यदि शुभ कार्य करते हैं तो उसका भी तीन गुना फल प्राप्त होगा इसलिए इस दिन आप धन का निवेश करके लाभ कमा सकते है  शेयर बाजार में निवेश करके भी इस दौरान लाभ अर्जित कर पाएंगे स्वर्ण और चांदी धातु में निवेश करना भी शुभ होगा, इस धनतेरस के दिन एक अन्य शुभ संयोग 3 ग्रहों ने मिलकर बनाया है सूर्य, मंगल और बुध ग्रह धनतेरस के दिन तुला राशि में गोचर करेंगे  बुध और मंगल मिलकर एक धन योग का निर्माण करते हैं, वहीं सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य योग का निर्माण होगा इस योग को राजयोग की श्रेणी में भी रखा गया है। वहीं यह योग तुला राशि में बन रहा है, जो व्यापार की कारक राशि मानी जाती है मंगल-बुध की युति को व्यापार के लिए बहुत शुभ माना जाता है इसलिए कारोबारी इस दिन निवेश करके या नयी योजनाओं को लागू करके आने वाले समय में आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं, मित्रों इस धनतेरस पर भौम प्रदोष व्रत भी है, इस दिन भगवान शिव और हनुमानजी की पूजा आराधना करना भी बहुत शुभ माना जाता है भौम प्रदोष व्रत के साथ धनतेरस के दिन 11 बजकर 31 मिनट के बाद चतुर्दशी तिथि है माना जाता है कि चतुर्दशी तिथि को ही हनुमान जी का जन्म हुआ था, इसलिए धनतेरस पर इसे भी शुभ संयोग माना जा रहा है हालांकि हनुमान जयंती 3 तारीख को मनाई जाएगी क्योंकि 3 तारीख को 9 बजे के बाद से चतुर्दशी तिथि लग रही है हालांकि सूर्योदय काल में चतुर्दशी तिथि नहीं होने के कारण इस बार चतुर्दशी तिथि का क्षय हो गया है धनतेरस पर बुध संक्रांति

धनतेरस के दिन बुध ग्रह का गोचर तुला राशि में होने वाला है, इसलिए इस दिन को बुध संक्रांति के रूप में भी जाना जा रहा है। बुध को ज्योतिष विज्ञान में व्यापार और बुद्धि का कारक ग्रह माना जाता है वहीं तुला राशि व्यापार और कारोबार से संबंधित राशि मानी गई हैं इसलिए धनतेरस के दिन बुध के गोचर को कारोबारियों के लिए बहुत शुभ माना जा रहा है,

इस दिन क्या करे क्या ना करें

नहीं तो हो सकता है नुकसान

धनतेरस पर बन रहे इन शुभ संयोगों में अगर निवेश करें या नई योजनाएं बनाएंगे तो फायदा मिल सकता है इसके साथ ही इस दिन दान पुण्य करने से भी सकारात्मक फल मिल सकते हैं लेकिन गलती से भी आर्थिक मामलों में कोई गलत निर्णय न लें नहीं तो नुकसान भी हो सकता है

मित्रों इस दिन उपवास रहकर यमराज की कथा का श्रवण भी करते हैं। आज से ही तीन दिन तक चलने वाला गो-त्रिरात्र व्रत भी शुरू होता है,

1 ,इस दिन धन्वंतरि जी का पूजन करें,

 2, नवीन झाडू एवं सूपड़ा खरीदकर उनका पूजन करें,

3,सायंकाल दीपक प्रज्वलित कर घर, दुकान आदि को श्रृंगारित करें,

 4,मंदिर, गौशाला, नदी के घाट, कुओं, तालाब, बगीचों में भी दीपक लगाएं,

5, यथाशक्ति तांबे, पीतल, चांदी के गृह-उपयोगी नवीन बर्तन व आभूषण क्रय करते हैं

 6, हल जुती मिट्टी को दूध में भिगोकर उसमें सेमर की शाखा डालकर तीन बार अपने शरीर पर फेरें

 7, कार्तिक स्नान करके प्रदोष काल में घाट, गौशाला, बावड़ी, कुआं, मंदिर आदि स्थानों पर तीन दिन तक दीपक जलाएं,

 8,कुबेर पूजन करें। शुभ मुहूर्त में अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान में नई गादी बिछाएं अथवा पुरानी गादी को ही साफ कर पुनः स्थापित करें। पश्चात नवीन वस्त्र बिछाएं,

 9,सायंकाल पश्चात तेरह दीपक प्रज्वलित कर तिजोरी में कुबेर का पूजन करें,

 10,निम्न ध्यान मंत्र बोलकर भगवान कुबेर पर फूल चढ़ाएं -

 श्रेष्ठ विमान पर विराजमान, गरुड़मणि के समान आभावाले, दोनों हाथों में गदा एवं वर धारण करने वाले, सिर पर श्रेष्ठ मुकुट से अलंकृत तुंदिल शरीर वाले, भगवान शिव के प्रिय मित्र निधीश्वर कुबेर का मैं ध्यान करता हूं,

 इसके पश्चात निम्न मंत्र द्वारा चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य से पूजन करें -

 'यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये 

धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।' 

 इसके पश्चात कपूर से आरती उतारकर मंत्र पुष्पांजलि अर्पित करें,

 11,यम के निमित्त दीपदान करें,

 12,तेरस के सायंकाल किसी पात्र में तिल के तेल से युक्त दीपक प्रज्वलित करें

 13,पश्चात गंध, पुष्प, अक्षत से पूजन कर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके यम से निम्न प्रार्थना करें-

 'मृत्युना दंडपाशाभ्याम्‌ कालेन श्यामया सह। 

त्रयोदश्यां दीपदानात्‌ सूर्यजः प्रयतां मम। 

 अब उन दीपकों से यम की प्रसन्नता के लिए सार्वजनिक स्थलों को प्रकाशित करें

14,धनतेरस या दीपावली की शाम को मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें और उसके बाद मां लक्ष्मी के चरणों में सात लक्ष्मीकारक कौडिय़ां रखें, आधी रात के बाद इन कौडिय़ों को घर के किसी कोने में गाड़ दें इस प्रयोग से शीघ्र ही आर्थिक उन्नति होने के योग बनेंगे

14, धन लाभ चाहने वाले लोगों के लिए कुबेर यंत्र मंत्र अत्यन्त सफलतादायक है, एक बार फिर से देख लिजिए धनतेरस या दीपावली के दिन बिल्व-वृक्ष के नीचे बैठकर इस यंत्र को सामने रखकर कुबेर मंत्र को शुद्धता पूर्वक जाप करने से यंत्र सिद्ध होता है तथा यंत्र सिद्ध होने के पश्चात इसे गल्ले या तिजोरी में स्थापित किया जाता है। इसके स्थापना के पश्चात् दरिद्रता का नाश होकर, प्रचुर धन व यश की प्राप्ति होती हैमंत्रऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन्य धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि में देहित दापय स्वाहा

16, धनतेरस या दीपावली पर महालक्ष्मी यंत्र का पूजन कर विधि-विधान पूर्वक इसकी स्थापना करें यह यंत्र धन वृद्धि के लिए अधिक उपयोगी माना गया है। कम समय में ज्यादा धन वृद्धि के लिए यह यंत्र अत्यन्त उपयोगी है इस यंत्र का प्रयोग दरिद्रता का नाश करता है यह स्वर्ण वर्षा करने वाला यंत्र कहा गया है इसकी कृपा से गरीब व्यक्ति भी एकाएक अमीर बन सकता है

17, पुराने चांदी के सिक्के और रुपयों के साथ कौड़ी रखकर उनका लक्ष्मी पूजन के समय केसर और हल्दी से पूजन करें पूजा के बाद इन्हे तिजोरी में रख दें इस उपाय से बरकत बढ़ती है,

18, धनतेरस या दीपावली की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कामों से निपट कर किसी लक्ष्मी मंदिर में जाएं और मां लक्ष्मी को कमल के फूल अर्पित करें और सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाएं मां लक्ष्मी से धन संबंधी समस्याओं के निवारण के लिए प्रार्थना करें। कुछ ही समय में आपकी समस्या का समाधान हो सकता है,

19,धनतेरस या दीपावली की शाम को घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं बत्ती में रुई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें, साथ ही दीए में थोड़ी सी केसर भी डाल दें, इस उपाय से भी धन का आगमन होने लगता है,

21, धनतेरस या दीपावली को विधिवत पूजा के बाद चांदी से निर्मित लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति को घर के पूजा स्थल पर रखना चाहिए, इसके बाद प्रतिदिन इनकी पूजा करने से घर में कभी धन की कमी नहीं होती और घर में सुख-शांति भी बनी रहती है,

21, श्रीकनकधारा धन प्राप्ति व दरिद्रता दूर करने के लिए अचूक यंत्र है इसकी पूजा से हर मनचाहा काम हो जाता है यह यंत्र अष्टसिद्धि व नवनिधियों को देने वाला है इसका पूजन व स्थापना भी धनतेरस या दीपावली के दिन करें,और 

नमक : धनतेरस पर नमक का नया पैकेट खरीदें। खाना बनाने में नया नमक ही प्रयोग करें। इससे धन की आवक में वृद्धि होगी। घर के उत्तर पूर्व कोने में थोड़ा सा नमक कटोरी अथवा छोटी डिब्बी में डालकर रख सकते हैं। इससे घर की नकारात्मकता खत्म होगी और धनागमन के साधन बनने लगेंगे।

साबुत धनिया : धनतेरस के दिन साबुत धनिया खरीदें। पूरी रात लक्ष्मी जी के सामने साबुत धनिया रखा रहने दें। अगले दिन प्रातः साबुत धनिए को गमले में बो दें। यह जब उगेगा तो हमारी आर्थिक स्थिति का संकेत देगा। अगर धनिए से हरा-भरा स्वस्थ पौधा निकले तो आर्थिक स्थिति सुदृढ़ रहती है। अगर धनिए का पौधा पतला है तो सामान्य आय होती है। पीला व बीमार पौधा निकले या पौधा नहीं निकले तो आर्थिक परेशानियां आती हैं।  

कौड़ी : धनतेरस के दिन कौड़ी खरीद कर घर लाएं और अपार धन प्राप्ति हेतु धनतेरस की रात्रि उनका षडोषोपचार पूजन कर केसर से रंगकर कौड़ियां पीले कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें। आश्चर्यजनक रूप से घर में धन का आगमन होगा, कमल गट्टे : घी में कमल गट्टे मिलाकर लक्ष्मी को प्रसाद चढ़ाने से व्यक्ति राजा जैसा जीवन जीता है। इसके अतिरिक्त 108 कमल गट्टों की माला लक्ष्मी जी पर चढ़ाने से व्यक्ति को स्थिर लक्ष्मी प्राप्त होती है। धन और बरकत के लिए कमल गट्टे की माला घर में रखें।गांठ वाली पीली हल्दी :  धनतेरस के दिन शुभ मुहूर्त देखकर बाजार से गांठ वाली पीली हल्दी अथवा काली हल्दी को घर लाएं। इस हल्दी को कोरे कपड़े पर रखकर स्थापित करें तथा षडोशपचार से पूजन करें।मिट्टी के तीन बड़े दीपक भी जरूर खरीदें. इन्हीं के प्रयोग से दिवाली की पूजा होगी. एक बड़ा मुख्य दीपक होगा जो मां लक्ष्मी को समर्पित होगा. दूसरा बड़ा सरसों के तेल का दीपक मां काली के लिए होगा. जबकि तीसरा दीपक तिरछा करके सरसों के तेल वाले दीपक के ऊपर रखा जाएगा, ताकि उसमें रात भर काजल बन सके.गोमती चक्र एक विशेष प्रकार का पत्थर है, जिसके एक तरफ चक्र की तरह आकृति बनी होती है. यह कई रंगों का होता है. इसमें सफेद रंग का गोमती चक्र सबसे महत्वपूर्ण है. यह रत्न की तरह अंगूठी में भी पहना जाता है. धनतेरस पर कम से कम पांच गोमती चक्र खरीदें. दिवाली के दिन गोमती चक्र मां लक्ष्मी को अर्पित किया जाएगा. इसके बाद अगले दिन उसे धन के स्थान पर रख दें.कौड़ी एक समुद्री जीव का एक खोल है. धन प्राप्ति के लिए और धन के रूप में इसका प्रयोग प्राचीन काल से होता रहा है. धनतेरस पर कम से कम पांच कौड़ी जरूर खरीदें. दिवाली के दिन इन कौड़ियों से विशेष पूजा करें. इससे अविवाहितों का विवाह होगा और कर्ज की समस्या से मुक्ति मिलेगी.झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. धनतेरस पर दो झाड़ू जरूर खरीदें. इनका प्रयोग दिवाली की पूजा के बाद अगले दिन से करें. पुरानी झाड़ू को दिवाली के अगले दिन घर से बाहर कर दें. धनतेरस पर झाड़ू खरीदने से वर्ष भर स्वास्थ्य अच्छा बना रहेगा. घर से पुरानी झाड़ू निकाल देने से नकारात्मक ऊर्जा निकल जाएगी.इस दिन धनिया के बीज खरीदने की भी परंपरा होती है. धनतेरस पर धनिया खरीदना बहुत शुभ माना जाता है. इसे समृद्धि का प्रतीक बताया गया है. लक्ष्मी पूजा के समय धनिया के बीज लक्ष्मी मां को चढ़ाएं और पूजा के बाद किसी बर्तन या बगीचे में धनिया के बीज बो दें. कुछ बीज गोमती चक्र के साथ अपनी तिजोरी में रखें.धनतेरस के दिन विवाहित महिलाओं को सोलह श्रृंगार का तोहफा देना शुभ माना जाता है. इसके अलावा लाल रंग की साड़ी और सिंदूर देना भी अच्छा माना जाता है. इससे भी लक्ष्मी मां प्रसन्न होती हैं.

और अब इस दिन क्या नहीं करना चाहिए,

सनातन धर्म शास्त्र के और सनातन धर्म के जानकारो के अनुसार,जो नहीं करना चाहिए,

स्टील से बनी चीजें- धनतेरस के दिन बहुत से लोग स्टील के बर्तन घर ले आते हैं, जबकि इन्हें खरीदने से बचना चाहिए. स्टील शुद्ध धातु नहीं है. इस पर राहु का प्रभाव भी ज्यादा होता है. आपको सिर्फ प्राकृतिक धातुओं की ही खरीदारी करनी चाहिए. मानव निर्मित धातु में से केवल पीतल खरीदा जा सकता है.

एल्यूमिनियम का सामान- धनतेरस पर कुछ लोग एल्यूमिनियम के बर्तन या सामान भी खरीद लेते हैं. इस धातु पर भी राहु का प्रभाव अधिक होता है. एल्यूमिनियम को दुर्भाग्य का सूचक माना गया है. त्योहार पर एल्यूमिनियम की कोई भी नई चीज घर में लाने से बचें.

लोहे की वस्तुएं-  मित्रों ज्योतिष शास्त्र अनुसार, लोहे को शनिदेव का कारक माना जाता है. इसलिए लोहे से बनी चीजों को धनतेरस पर भूलकर भी खरीदने की गलती न करें. ऐसा करने से त्योहार पर धन कुबेर की कृपा नहीं होती है. नुकीली या धारदार चीजें- धनतेरस के दिन धारदार वस्तुएं खरीदने से बचें. इस दिन चाकू, कैंची, पिन, सूई या कोई धारदार सामान खरीदने से सख्त परहेज करना चाहिए. धनतेरस पर इन चीजों को खरीदना शुभ नहीं माना जाता है. प्लास्टिक का सामान- धनतेरस पर कुछ लोग प्लास्टिक की बनी चीजें घर ले आते हैं. बता दें कि प्लास्टिक बरकत नहीं देता है. इसलिए धनतेरस पर प्लास्टिक से बना किसी भी तरह का सामान घर न लेकर आएं. चीनी मिट्टी के बर्तन- धनतेरस पर सेरामिक (चीनी मिट्टी) से बने बर्तन या गुलदस्ता आदि खरीदना से बचना चाहिए. इन चीजों में स्थायित्व नहीं रहता है, जिससे घर में बरकत की कमी रहती है. इसलिए सेरामिक से बनी चीजें बिल्कुल न खरीदें. कांच के बर्तन- धनतेरस पर कुछ लोग कांच के बर्तन या दूसरी चीजें खरीदते हैं. कांच का संबंध राहु से माना जाता है, इसलिए धनतेरस के दिन इसे खरीदने से बचना चाहिए. इस दिन कांच की चीजों का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए. काले रंग की चीजें- धनतेरस के दिन काले रंग की चीजों को घर लाने से बचना चाहिए. धनतेरस एक बहुत ही शुभ दिन है, जबकि काला रंग हमेशा से दुर्भाग्य का प्रतीक माना गया है. इसलिए धनतेरस पर काले रंग की चीजें खरीदने से बचें. खाली बर्तन घर ना लाएं- धनतेरस के दिन यदि आप कोई बर्तन या इस्तेमाल करने का सामान खरीदने की योजना बना रहे हैं तो ध्यान रखें कि उसे घर में खाली न लेकर आएं. घर में बर्तन लाने से पहले इसे पानी, चावल या किसी दूसरी सामग्री से भर लें.

मिलावटी चीजें- धनतेरस के दिन यदि आप तेल या घी जैसी चीजें खरीदने जा रहे हैं तो थोड़ा सतर्क रहिए. ऐसी चीजों में मिलावट हो सकती है और इस दिन अशुद्ध चीजें खरीदने से बचना चाहिए. धनतेरस पर अशुद्ध तेल या घी के दीपक ना जलाएं.

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